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     होम पेज > कलीसिया >  2014-04-07 15:10:58
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येसु में एक पूर्ण एवं अमर जीवन



वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 अप्रैल 2014 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, रविवार 6 अप्रैल को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्हें सम्बोधित कर कहा,
"अति प्रिय भाइयो एवं बहनो,
सुप्रभात,
चालीसे काल के पाँचवें रविवार का सुसमाचार पाठ लाज़रुस के पुनरुथान के बारे में बतलाता है जो येसु के चमत्कारी ‘चिन्हों’ की पराकाष्ठा है। यह एक महान संकेत है, इतना पवित्र है कि महापुरोहितों द्वारा स्वीकार कर पाने की शक्ति के परे। जिसके कारण इस सच्चाई को परखने के पश्चात् उन्होंने येसु को मार डालने का निश्चय किया था।"(यो.11:53) "लाजरूस येसु के आने के तीन दिनों पूर्व मर चुका था। ऐसी दुखःद परिस्थिति में लाज़रुस की बहनों, मार्था और मरियम, से येसु ने सांत्वना स्वरूप जो कहा वह ख्रीस्तीय समुदाय में सदा के लिए एक गूँज बन कर रह गया है। येसु ने कहा, "पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ जो मुझ में विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा।"(यो.11:25)" संत पापा ने कहा कि प्रभु के इस कथन पर हम विश्वास करते हैं कि जो येसु में विश्वास करते हैं, उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, मृत्यु के पश्चात् वे नवजीवन प्राप्त करेंगे, एक पूर्ण एवं अमर जीवन। जैसे येसु मृत्यु के बाद सशरीर पुनर्जीवित हुए, एक संसारिक जीवन के लिए नहीं किन्तु अनन्त जीवन के लिए, उसी प्रकार हम अपने शरीर के साथ पुनर्जीवित होंगे जो एक महिमान्वित शरीर होगा। वे पिता के साथ हमारा इंतजार कर रहे हैं तथा जिस पवित्र आत्मा की शक्ति से वे जी उठे वही हमें भी पुनर्जीवित कर देगा।

संत पापा ने कहा, "अपने मित्र लाज़रुस की बंद कब्र के पास जाकर ईसा ने ऊँचें स्वर से पुकारा, लाजरुस! बाहर निकल आओ! मृतक बाहर निकला। उसके हाथ और पैर पटिटयों से बँधे हुये थे और उसके मुख पर अँगोछा लपेटा हुआ था। ईसा ने लोगो से कहा, इसके बन्धन खोल दो और चलने-फिरने दो।"(पद.43-44) यह कथन सभी लोगों के लिए अनिवार्य चिन्ह है क्योंकि हम सभी मृत्यु के अंक से अंकित किये गये हैं। हमारे जीवन के मालिक प्रभु कहते हैं, "मैं इसलिए आया हूँ कि वे जीवन प्राप्त करें- बल्कि परिपूर्ण जीवन प्राप्त करें।"(यो.10:10) ख्रीस्त हमारे उन कब्रों पर राज नहीं करते जिनको हमने अपनी गलतियों, पापों तथा बुराई एवं मृत्यु के चुनाव द्वारा निर्मित किया है। वे हमें पाप की कब्र से बाहर आने का निमंत्रण देते हैं ताकि हम अंधकार की कैद में सिमटे रहकर स्वार्थ, झूठ एवं सामान्य जीवन से संतुष्ट न रहें।

येसु हम सभी को सच्ची स्वतंत्रता के लिए निमंत्रण दे रहे हैं, आज वे हम में से प्रत्येक जन से कह रहे हैं, बाहर आओ। घमंड के बंधन से हमें मुक्त करने वाली उस वाणी को हम सुनें क्योंकि घमंड हमें कई बुराईयों का दास बना देता है। संत पापा ने कहा, "जब हम येसु के आदेश को सुनने का निश्चय करते हैं तब हमारे चेहरे से मुखौटा हट जाता है और यहीं पर हमारे पुनरुत्थान की शुरूआत होती है और हमारा असली चेहरा रौनक प्राप्त करता है जिसे ईश्वर ने अपने प्रतिरूप में सृष्ट किया है।
येसु द्वारा लाज़रुस को पुनर्जीवित किये जाने का चमत्कार दर्शाता है कि लाज़रुस ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के कितना योग्य था, उसी प्रकार हमारा मन-परिवर्तन भी हमारी उदारता पर निर्भर है। किन्तु हमारे प्रति ईश्वर की करूणा की कोई सीमा नहीं है। ईश्वर हमारी पाप रूपी कब्र का पत्थर हटाने के लिए हमेशा तैयार हैं जो हमें जीवितों के प्रकाश, ईश्वर से अलग कर देता है।

इतना कहने के पश्चात् संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।
देवदूत प्रार्थना का पाठ समाप्त करने के पश्चात् संत पापा ने देश-विदेश से एकत्र सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया।
उन्होंने उन्हें संबोधित कर कहा, "रवांडा के तुत्सी में 7 अप्रैल सन् 1994 ई. में घटित नरसंहार की 20 वीं सालगिरह पर, मैं रवंडा वासियों के प्रति अपनी आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त करता हूँ तथा उन्हें आशा एवं दृढ़-संकल्प का प्रोत्साहन देता हूँ। मेल-मिलाप की प्रक्रिया में मानव के प्रति समर्पण एवं देश के आध्यात्मिक पुनर्निर्माण का परिणाम सामने आ चुका है। मैं आप सभी से कहता हूँ भयभीत न हों, सुसमाचार की चट्टान पर अपना समुदाय प्यार एवं सद्भाव से निर्मित करें जो अनन्त शांति प्राप्त करने के लिए एकमात्र रास्ता है। संत पापा ने रवांडा के धर्माध्यक्ष के साथ, रवांडा के सभी लोगों को किबेहो की माता मरिया की सुरक्षा में सौंपते हुए उनके लिए ‘प्रणाम मरिया’ प्रार्थना का पाठ किया।

तत्पश्चात् संत पापा ने पुनः सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रूप से दृढ़ीकरण संस्कार ग्रहण करने की तैयारी कर रहे बच्चों का अभिवादन किया।
संत पापा ने इटली के आक्वीला एवं आस-पास के क्षेत्रों में, पाँच वर्षों पूर्व आये भूकम्प की याद की तथा उस भूकम्प की मार अभी भी झेल रहे सभी लोगों के प्रति उन्होंने अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया। उन्होंने ईश्वर पर पूर्ण भरोसा रखते हुए माता मरिया की मध्यस्थता से सभी पीड़ितों के लिए प्रार्थना की कि वे कठिनाईयों से ऊपर उठें। एकजुटता और आध्यात्मिक नवीनीकरण भौतिक पुनर्निर्माण की ताकत हैं।
संत पापा ने गयाना और पड़ोसी देशों में फैले एबोला रोगाणुओं के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना की कि ईश्वर उस किटाणु से बचने में उनके प्रयास को सफल करे तथा उन्हें आवश्यक मदद मिल सके।

इसके पश्चात् संत पापा ने सुसमाचार की छोटी प्रति भेंट करते हुए कहा, "अभी मैं आप सभी को एक छोटा चिन्ह प्रदान करना चाहता हूँ। पिछले कई रविवार को मैंने आपको सुसमाचार अपने पास रखने और उसे दिन में पढ़ने की सलाह दी थी। मैंने याद किया कि परम्परा के अनुसार चालीसा काल में नवदीक्षितों को सुसमाचार की प्रति भेंट की जाती है अतः आज मैं उसी के प्रतीक स्वरूप आप सभी को सुसमाचार की छोटी प्रति मुफ्त में प्रदान कर रहा हूँ। आप संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण से उसे ग्रहण करें तथा प्रतिदिन उसका पाठ करें। यह येसु का वचन है इसके द्वारा येसु हम से बातें करते हैं। जिस प्रकार आपने उसे मुफ्त में पाया है उसी प्रकार, सुसमाचार के संदेश को अन्य को बांटें। यदि आप में से कोई इसका मूल्य चुकाना चाहते हैं तो आप उदारता के कार्यों में हाथ बटायें, निःस्वार्थ प्यार करें तथा अपने दुश्मनों के लिए प्रार्थना एवं उनसे मेल-मिलाप करें। आज सुसमाचार को कई माध्यमों द्वारा पढ़ा जा सकता है जैसे मोबाईल, टाब्लेट आदि किन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात है सुसमाचार का पाठ। आप इसे खुले हृदय से पढ़ें जिससे कि यह अधिक फल उत्पन्न करे।
अंत में संत पापा ने सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।

Usha Tirkey


कांदिविदी






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