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     होम पेज > कलीसिया >  2014-04-16 15:57:49
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2 अप्रैल 2014



श्रोताओं के पत्र
पत्र- नमस्कार! खुशी के साथ सूचित करना है कि 'वाटिकन भारती' के नवम्बर/दिसम्बर 2013 अंक का कुल 50 प्रति प्राप्त हुआ। इसमें छपे सभी लेख शिक्षाप्रद, प्रेरणादायक तथा सारगर्भित लगे। पत्रिका भेजने तथा सुन्दर लेख छापने के लिए वाटिकन रेडियो परिवार को हार्दिक धन्यवाद!
नमस्कार! खुशी के साथ सूचित करना है कि आपके द्वारा भेजा गया 'कैलेण्डर 2014' का 25 प्रति प्राप्त हुआ। इस वर्ष का कैलेण्डर सूचनाप्रद तथा आकर्षक है। ईश्वर आपको आशीष दे।
डॉ. हेमान्त कुमार, गोराडीह भागलपुर, बिहार।
पत्र- सेवा में आदरणीय, अध्यक्ष महोदय सादर नमन।
महोदय आपके द्वारा प्रेषित वाटिकन भारती के मार्च से जून 2013 के अंक में संत पापा फ्रांसिस की नियुक्ति बड़े हर्ष का विषय है। विश्व का सत्य, अहिंसा एवं शांति की सद्भावना को और अधिक बल प्राप्त होगा। यदि कोई धर्मगुरु न हो तो वह धर्म पथ भ्रष्ट हो सकता है अतः गुरु का होना नितांत आवश्यक है। गुरु ही हमें सदभाव, सच्चाई, प्रभु की महिमा के विषय में ज्ञान प्रदान करते हैं अतः गुरु परम पूज्य ईश्वर तुल्य है।
सभी धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, पारिवारिक जीवन के उच्च आदर्शों की संवाहिका वाटिकन भारती अति उत्तम एवं उत्कृष्ट पत्रिका है जो हिन्दी भाषा का भी उत्थान कर रही है। मैं वाटिकन रेडियो क्षेत्रीय कार्यालय, राँची का आभार व्यक्त करता हॅूं कि आप हिन्दी की अति उत्तम पत्रिका का प्रकाशन करते हैं जो अल्प पृकीप होते हुए भी अद्वितीय ज्ञान का सागर है।
समस्त वाटिकन रेडियो एवं वाटिकन भारती के कर्मचारियों, अधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। आपके उज्जवल भविष्य व स्वस्थ जीवन की शुभकामनाओं सहित जय भारत।
ज़गीर चन्द्र बन्दरजूड़ा, बेलपोखरा, नैनीताल।
पत्र- 15.3.14
अति माननीय फादर जस्टिन, मिस जुलियेट ख्रीस्टोफर एवं सि.उषा आप तीनों को कम्पबेल बे पल्ली ग्रेट निकोबार के प्रत्येक पल्लीवासी की तरफ से सादर प्रणाम। आपने मुझे मेरे पल्लीवासियों को वाटिकन रेडियो से जोड़ने के लिए शुभकामनाओं सहित धन्यवाद दिया है। मेरी तो यही इच्छा है कि न सिर्फ मेरे पल्ली के लोकधर्मी परन्तु इन द्वीपों के और भी अनेक लोग वाटिकन रेडियो से जुड़ें।
आपने मुझ से अर्जी की है कि मैं अपने पल्लीवासियों को अपने विचार लिख भेजने के लिए प्रोत्साहित करूँ। अब तक जितनों को मैंने वाटिकन रेडियो के प्रसारित कार्यक्रम सुनायें हैं तो मेरी केवल एक ही अभिलाषा रही है कि वे इन कार्यक्रमों को सुनकर प्रेरणा प्राप्त करें और अन्य श्रोताओं का तरह अपने विचार आपको लिखकर भेजें। अब आप के अनुरोध पर मैं अपने पल्लीवासियों को स्पष्ट शब्दों में पत्र लिखने का आग्रह करूँगा।
सप्रेम जय येसु। फादर सिप्रियन।
फादर सिप्रियन खलखो, कैम्पबेल बे, ग्रेट निकोबार।

Usha Tirkey


कांदिविदी






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