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     होम पेज > कलीसिया >  2014-05-07 16:59:30
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7 मई 2014



श्रोताओ के पत्र
पत्र- महाशय, नमस्कार! परम सम्मान के साथ सहर्ष सूचित करना है कि मैँ वाटिकन रेडियो का नियमित, पुराना तथा जागरूक श्रोता हूँ। आपके द्वारा प्रसारित सभी कार्यक्रम शांतिदायक, ज्ञानवर्धक, शिक्षाप्रद, प्रेरणादायक और सारगर्भित होते हैं। कार्यक्रम प्रस्तुतिकरण शैली तथा प्रसारण गुणवत्ता उच्च स्तर के हैं। इसलिए कार्यक्रम सुनकर नियमित पत्र लिखने का प्रयास करता हूँ। आपके फेसबुक और वेबसाइट भी बहुत अच्छे लगते है। 04 अप्रैल को शाम की सभा में कार्यक्रम-सामयिक लोकोपकारी चर्चा मेँ पोप जॉन 23 वेँ की जीवनी पर दिया गया जानकारी प्रेरणादायक लगी। धन्यवाद!
डॉ. हेमन्त कुमार, गोराडीह भागलपुर, बिहार।
पत्र- आदरणीय पिताजी आप सभी को प्रभु येसु के नाम में नमस्कार। यह जानकर दुःख हुआ कि चीन की सरकार ने एक गिरजाघर ध्वस्त कर दिया है। ऐसी सरकार को प्रभु येसु कभी माफ़ नहीं करेंगे|
विद्यानन्द राम दयाल, पियर्स मोरिसस।
पत्र- सत् प्रकाशन संचार केन्द्र इन्दौर के कलाकारों की प्रस्तुति नाटक- ‘औकात’ बहुत ही अच्छा लगा। इसके लिए कलाकारों को हार्दिक बधाई। नाटक में यह बताया जाता है कि किस तरह एक पेन की रीफिल बनाते-बनाते एक दिन वह रीफिल फैक्टरी का मालिक बन जाता है। जिस दिन इस नाटक को सुना, उसी दिन धुर्वा राँची, झारखंड में नरेन्द्र मोदी की विशाल रैली सम्पन्न हुई। नाटक के कलाकार की बेराजगारी के दर्द को जब मैंने सुना तथा झारखंड के युवक-युवतियों की बेराजगारी के दर्द पर जब नरेन्द्र मोदी ने प्रकाश डाला, तो यह मेरी नजर में एक दर्द हो कर भी कुछ अलग दर्द लगा। नरेन्द्र मोदी झारखंड के पिछड़ा होने का कारण कॉग्रेस सरकार का झारखंड के साथ सौतेलापन रवैये को जिम्मेवार मानते हैं। जबकि मेरी नजर में झारखंड में शासन तो अधिक समय तक भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने किया है। जब भाजपा के शासनकाल में झारखंड का विनाश हुआ है तो विकास की उम्मीद करना बेईमानी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं। आम जनता को हानि उठानी पड़ती है। नरेन्द्र मोदी विकास की बात करते हैं। परन्तु झारखंड का विकास कैसे होगा, इस बात की मोदी जी को पता ही नहीं है। लोक-लुभावन के लिए वादे करना अच्छी बात नहीं है। मेरे विचार से झारखंड के टांड़-दोन पर गहरी बोरिंग वेल होनी चाहिए, ताकि हर समय फसलों को पानी मिले, झारखंड में साल भर में दो या तीन बार फसल मिलने लगेगा तो भूखमरी स्वतः ही समाप्त हो जायगी, जब किसान ही भूखा रहेगा तो अन्न कौन उपजायेगा, इस छोटी सी समस्या से मोदी अनजान हैं तो झारखंड का कुछ विकास नहीं होगा ये बात मोदी के एजेन्डे में भी नहीं है। अगर होता तो भाषण में जरूर बोलते, अभी भी मोदी झारखंड की जमीनी हकीकत धरातलीय समस्या को नहीं जानते है। केवल कांग्रेस को दोष देते हैं। वास्तव में कॉग्रेस को दोष देने से अच्छा एक बार झारखंड का विकास करके दिखा दे तो हम नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष मानेंगे। इस समय कांग्रेस का जो हाल है उसके लिए मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और सोनिया गांधी खुद जिम्मेवार हैं। इतना असफल प्रधानमंत्री अब तक नहीं देखा था।
श्री सुकरा कुमार हेमरोम, पहनटोली कासमार, खूँटी तोरपा, झारखंड।

Usha Tirkey


कांदिविदी






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